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पश्चिम एशिया में सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच सैन्य संघर्ष गहरा गया है। सुरक्षा चिंताओं के बीच क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पश्चिम एशिया में एक बार फिर युद्ध के बादल गहरे मंडराने लगे हैं। यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच सैन्य तनाव चरम पर पहुंच गया है। हाल के दिनों में सीमावर्ती इलाकों और प्रमुख शहरों को निशाना बनाकर किए गए हमलों के बाद सऊदी अरब ने अपनी वायु रक्षा प्रणालियों को हाई अलर्ट पर रखा है। पवित्र शहर मक्का और व्यावसायिक केंद्र जेद्दा के आसपास सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व रूप से कड़ी कर दी गई है।
दूसरी ओर, यमन में हूती ठिकानों पर हुए भीषण हवाई हमलों के बाद स्थिति और विकट हो गई है। लाल सागर से लेकर अरब प्रायद्वीप तक फैले इस संघर्ष का सीधा असर वैश्विक व्यापार, कच्चे तेल की आपूर्ति और दक्षिण एशिया की सुरक्षा पर पड़ रहा है। राजनयिक गलियारों में इस बात को लेकर चिंता बढ़ गई है कि यदि यह संघर्ष और फैला, तो पूरे क्षेत्र में अस्थिरता का नया दौर शुरू हो सकता है।
सऊदी अरब ने हूती विद्रोहियों द्वारा दागे गए ड्रोन और मिसाइल हमलों की आशंका को देखते हुए अपने प्रमुख क्षेत्रों में हवाई सुरक्षा बढ़ा दी है। मक्का और जेद्दा जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक और आर्थिक केंद्रों के पास अलर्ट जारी किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम आम नागरिकों और अवसंरचना की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एहतियातन उठाया गया है।
हूती विद्रोही पिछले कुछ समय से सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों और हवाई अड्डों को निशाना बनाते रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि पवित्र शहरों के निकट सुरक्षा अलर्ट का बढ़ना यह दर्शाता है कि रक्षा तंत्र किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए अत्यंत सतर्क है।
जवाबी कार्रवाई के तहत यमन में हूती नियंत्रण वाले क्षेत्रों, विशेष रूप से राजधानी सना और प्रमुख बंदरगाह शहर हुदैदा के आसपास बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए गए हैं। इन हमलों का मुख्य उद्देश्य विद्रोहियों के मिसाइल लॉन्चिंग पैड, हथियार डिपो और कमान केंद्रों को नष्ट करना है।
हालांकि, हूती विद्रोहियों ने स्पष्ट किया है कि वे ऐसे सैन्य अभियानों से पीछे नहीं हटेंगे। उनका दावा है कि जब तक यमन पर नाकाबंदी और हमले बंद नहीं होते, तब तक वे अपनी रक्षात्मक और आक्रामक कार्रवाइयां जारी रखेंगे। इस सैन्य चक्र ने यमन में लंबे समय से जारी मानवीय संकट को और अधिक गंभीर बना दिया है।
इस संघर्ष के तेज होते ही क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियों का रुख भी चर्चा का विषय बन गया है। सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, सऊदी अरब पारंपरिक रूप से अपनी सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों और क्षेत्रीय साझेदारों पर निर्भर रहा है। हालांकि, मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति में कई देश सीधे सैन्य जुड़ाव से बच रहे हैं।
पश्चिम एशिया में अस्थिरता का सीधा असर भारत और अन्य दक्षिण एशियाई देशों पर पड़ता है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा काफी हद तक खाड़ी देशों से आने वाले कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस पर निर्भर है। यदि संघर्ष के कारण लाल सागर या फारस की खाड़ी में जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो वैश्विक तेल कीमतों में उछाल आ सकता है।
इसके अलावा, खाड़ी देशों में लाखों भारतीय नागरिक काम करते हैं। इन देशों में सुरक्षा स्थिति बिगड़ने से उनके रोजगार और सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ जाती हैं। यही कारण है कि भारत लगातार संवाद और कूटनीति के माध्यम से शांति स्थापित करने का आग्रह करता रहा है।
हूती यमन के शिया ज़ैदी समुदाय का एक सशस्त्र समूह हैं, जिसने 2014 में यमन की सरकार को बेदखल कर दिया था। सऊदी अरब अपनी सीमा पर शिया उग्रवादियों के प्रभाव को रोकने के लिए 2015 से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में सैन्य अभियान चला रहा है।
हूती विद्रोहियों द्वारा सीमा पार लंबी दूरी की मिसाइलों और ड्रोन हमलों की बढ़ती क्षमता को देखते हुए, सुरक्षा एजेंसियों ने एहतियातन इन प्रमुख शहरों में अलर्ट जारी किया है ताकि नागरिक सुरक्षा और रक्षा तैयारियों को सुनिश्चित किया जा सके।
हां, यदि खाड़ी क्षेत्र में बुनियादी ढांचे या समुद्री व्यापार मार्गों (जैसे लाल सागर) पर हमले जारी रहते हैं, तो आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है, जिससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच गहराता संघर्ष केवल एक क्षेत्रीय विवाद नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा है। सैन्य अभियानों और जवाबी हमलों के इस चक्र से मानवीय संकट गहराने की पूरी आशंका है। यदि समय रहते अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के जरिए स्थायी युद्धविराम की दिशा में कदम नहीं उठाए गए, तो इसका दुष्परिणाम पूरे पश्चिम एशिया के साथ-साथ निर्भर अर्थव्यवस्थाओं को भी भुगतना पड़ सकता है।
स्रोत: यह रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। मूल कवरेज: Navbharat Times.
फ़ोटो: اماز لتصاميم الزفاف / Pexels