ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: पुतिन का पश्चिमी देशों पर निशाना, पीएम मोदी ने दिया सहयोग का संदेश

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: पुतिन का पश्चिमी देशों पर निशाना, पीएम मोदी ने दिया सहयोग का संदेश

ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था और कूटनीति पर चर्चा हुई। रूसी राष्ट्रपति ने जी-7 पर टिप्पणी की, वहीं भारत ने निष्पक्ष वैश्विक व्यवस्था की वकालत की।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बदलती भू-राजनीतिक स्थिति के बीच ब्रिक्स समूह की बैठक में वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय शासन प्रणाली को लेकर महत्वपूर्ण विचार साझा किए गए। इस सम्मेलन में सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं ने वर्तमान वैश्विक चुनौतियों, व्यापारिक संबंधों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।

सम्मेलन के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों के आर्थिक प्रभुत्व पर सवाल उठाए, जबकि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समावेशी विकास और विकासशील देशों के हितों की रक्षा पर बल दिया। यह मंच वैश्विक स्तर पर बहुध्रुवीय व्यवस्था को मजबूत करने के दृष्टिकोण से काफी अहम माना जा रहा है।

रूसी राष्ट्रपति का पश्चिमी नीतियों पर रुख

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने संबोधन में जी-7 देशों के समूह और उनकी आर्थिक नीतियों पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि वैश्विक आर्थिक संतुलन अब बदल रहा है और उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं दुनिया के विकास को गति दे रही हैं। उनके अनुसार, पारंपरिक पश्चिमी ताकतें अब पहले जैसी आर्थिक मजबूती नहीं रखतीं, फिर भी वे अंतरराष्ट्रीय नीतियों को अपने अनुसार निर्देशित करने का प्रयास करती हैं।

पुतिन ने इस बात पर जोर दिया कि ब्रिक्स देशों की सामूहिक आर्थिक क्षमता अब कई मामलों में पारंपरिक समूहों से अधिक प्रभावी हो रही है। उन्होंने प्रतिबंधों की राजनीति की आलोचना करते हुए स्वतंत्र आर्थिक तंत्र और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने की आवश्यकता दोहराई।

भारत का दृष्टिकोण: समावेशी विकास और संतुलन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में ब्रिक्स को एक ऐसे मंच के रूप में प्रस्तुत किया जो ‘ग्लोबल साउथ’ यानी विकासशील और अविकसित देशों की आवाज को मजबूती प्रदान करता है। भारत का मुख्य फोकस शांति, संवाद और स्थिर आर्थिक साझेदारी पर रहा।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि समूह का उद्देश्य किसी अन्य मंच के विरोध में खड़ा होना नहीं, बल्कि एक निष्पक्ष और पारदर्शी वैश्विक व्यवस्था का निर्माण करना है। भारत ने तकनीकी सहयोग, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और सतत विकास के क्षेत्रों में साझीदार देशों के साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया।

ब्रिक्स का विस्तार और बदलता वैश्विक प्रभाव

हाल के समय में ब्रिक्स में नए सदस्यों के शामिल होने से इस समूह का वैश्विक दायरा और प्रभाव काफी बढ़ा है। यह समूह अब न केवल आबादी बल्कि ऊर्जा उत्पादन और आर्थिक उत्पादन के मामले में भी दुनिया के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।

  • आर्थिक विविधता: नए सदस्यों के जुड़ने से व्यापार और निवेश के नए रास्ते खुले हैं।
  • ऊर्जा सुरक्षा: प्रमुख तेल उत्पादक देशों की मौजूदगी से वैश्विक ऊर्जा बाजार में समूह का प्रभाव बढ़ा है।
  • वित्तीय विकल्प: डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए स्थानीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देने पर सहमति बन रही है।

कूटनीतिक संतुलन की चुनौतियां

भारत जैसे देशों के लिए ब्रिक्स मंच पर पश्चिमी देशों के साथ अपने मजबूत संबंधों और यूरेशियाई देशों के साथ पारंपरिक साझीदारी के बीच संतुलन साधना एक महत्वपूर्ण कार्य है। भारत लगातार यह संदेश देता रहा है कि वैश्विक समस्याओं का समाधान टकराव के बजाय कूटनीति और बातचीत के माध्यम से ही निकाला जाना चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक मंचों पर विभाजन के बढ़ते दौर में ब्रिक्स जैसे समूह विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को अपनी शर्तें तय करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी बात रखने की ताकत प्रदान करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

ब्रिक्स समूह में कौन-कौन से प्रमुख देश शामिल हैं?

मूल रूप से इस समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे, लेकिन हाल ही में इसमें कई नए देशों को शामिल कर इसका विस्तार किया गया है।

ब्रिक्स सम्मेलन में स्थानीय मुद्राओं के उपयोग पर जोर क्यों दिया जा रहा है?

सदस्य देश डॉलर के उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के जोखिम से बचने के लिए द्विपक्षीय व्यापार में अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं का उपयोग बढ़ाने पर काम कर रहे हैं।

भारत के लिए ब्रिक्स का क्या महत्व है?

भारत के लिए ब्रिक्स ग्लोबल साउथ के हितों को आगे बढ़ाने, रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को मजबूत करने का एक सशक्त मंच है।

Bottom Line

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक राजनीति और अर्थशास्त्र अब केवल कुछ देशों के फैसलों तक सीमित नहीं रह गया है। जहां रूस ने पश्चिमी नीतियों के खिलाफ आक्रामक रुख दिखाया, वहीं भारत ने संतुलित दृष्टिकोण के साथ रचनात्मक सहयोग और वैश्विक सुधारों की आवश्यकता को रेखांकित किया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह समूह वैश्विक संस्थानों में वास्तविक सुधार लाने में कितना प्रभावी साबित होता है।

स्रोत: यह रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। मूल कवरेज: Dainik Bhaskar.

फ़ोटो: Mikhail Nilov / Pexels

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