Physical Address
304 North Cardinal St.
Dorchester Center, MA 02124
Physical Address
304 North Cardinal St.
Dorchester Center, MA 02124

रूस के कज़ान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात ने द्विपक्षीय संबंधों को एक नई दिशा दी है।
हाल ही में रूस के कज़ान शहर में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और चीन के बीच कूटनीतिक स्तर पर एक बड़ी बर्फ पिघलती नजर आई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक को वैश्विक मीडिया और कूटनीतिक हलकों में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों से वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जारी सैन्य गतिरोध के बीच इस मुलाकात ने दोनों देशों के संबंधों को एक नई दिशा देने का काम किया है।
इस बैठक से ठीक पहले दोनों देशों के बीच पूर्वी लद्दाख में गश्त (पेट्रोलिंग) को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ था। इस समझौते के बाद दोनों नेताओं की औपचारिक बातचीत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि एशिया की दो सबसे बड़ी ताकतें अब अपने तनावपूर्ण संबंधों को पटरी पर लाने के लिए गंभीर हैं। इस घटनाक्रम को न केवल द्विपक्षीय नजरिए से, बल्कि बहुपक्षीय मंचों पर दोनों देशों की भूमिका के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है।
वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद से भारत और चीन के रिश्ते अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे। दोनों देशों ने सीमा पर भारी संख्या में सैनिकों और हथियारों की तैनाती कर रखी थी। सैन्य और राजनयिक स्तर पर कई दौर की वार्ताओं के बाद आखिरकार दोनों पक्ष गश्त के पुराने तौर-तरीकों को बहाल करने पर सहमत हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से सीमा पर तनाव कम होगा और भविष्य में किसी भी अप्रत्याशित झड़प की आशंका घटेगी। भारत ने हमेशा से यह रुख अपनाया है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बहाल हुए बिना द्विपक्षीय संबंधों का सामान्य होना संभव नहीं है। इस नए समझौते को इसी दिशा में एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
चीनी मीडिया और वहां के रणनीतिक विश्लेषक भारत के साथ इस नए तालमेल को बेहद बारीकी से देख रहे हैं। चीन के सरकारी मीडिया और थिंक-टैंक इस बात पर जोर दे रहे हैं कि वैश्विक भू-राजनीति में आ रहे बदलावों के बीच दोनों देशों का साथ आना जरूरी है। विशेष रूप से आगामी वर्षों में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलनों और वैश्विक आर्थिक मंचों पर दोनों देशों की भूमिका को लेकर चीन सकारात्मक संकेत दे रहा है।
चीन का मानना है कि विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व के तौर पर ब्रिक्स का मजबूत होना आवश्यक है, और इसके लिए भारत और चीन के बीच सहयोग अनिवार्य है। चीनी विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिमी देशों के आर्थिक प्रभाव का मुकाबला करने के लिए दोनों पड़ोसियों को आपसी मतभेदों को पीछे छोड़कर आर्थिक और व्यापारिक मोर्चे पर आगे बढ़ना होगा।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग के बीच हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। भारतीय पक्ष ने सीमा पर शांति बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया, जबकि चीनी पक्ष ने बहुपक्षीय सहयोग और विकास पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही।
भारत और चीन के बीच सुधरते संबंधों का असर केवल एशिया पर ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ेगा। अमेरिका और पश्चिमी देश इस घटनाक्रम पर पैनी नजर रख रहे हैं। भारत जहां एक तरफ क्वाड (Quad) का सक्रिय सदस्य है, वहीं दूसरी तरफ ब्रिक्स के माध्यम से रूस और चीन के साथ भी मंच साझा करता है। भारत की यह संतुलित विदेश नीति उसे वैश्विक मंच पर एक बेहद मजबूत स्थिति में खड़ा करती है।
नहीं, वर्तमान समझौता केवल पूर्वी लद्दाख के विशिष्ट क्षेत्रों में गश्त (पेट्रोलिंग) शुरू करने और तनाव को कम करने से संबंधित है। सीमा विवाद के पूर्ण और स्थाई समाधान के लिए अभी दोनों देशों के बीच लंबी कूटनीतिक बातचीत की आवश्यकता होगी।
भारत और चीन दोनों ही ब्रिक्स के संस्थापक सदस्य हैं। वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) और जनसंख्या में इस संगठन का बड़ा हिस्सा है, जिसमें इन दोनों देशों का योगदान सबसे अधिक है। दोनों देश मिलकर विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक मंचों पर मजबूती से उठाते हैं।
सीमा पर तनाव कम होने से दोनों देशों के बीच व्यापारिक अनिश्चितता कम होगी। हालांकि, भारत सरकार चीनी निवेश और ऐप्स पर सुरक्षा कारणों से सख्त निगरानी जारी रख सकती है, लेकिन आने वाले समय में कुछ क्षेत्रों में नियमों में ढील दी जा सकती है।
भारत और चीन के बीच हालिया समझौता और ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान दोनों शीर्ष नेताओं की मुलाकात द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रस्थान बिंदु है। हालांकि, दशकों पुराने सीमा विवाद को रातों-रात हल नहीं किया जा सकता, लेकिन बातचीत की मेज पर वापस आना और जमीनी स्तर पर तनाव कम करना एक सकारात्मक संकेत है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों देश इस नए भरोसे को कितनी मजबूती से आगे बढ़ाते हैं और वैश्विक मंचों पर एक-दूसरे के हितों का कितना सम्मान करते हैं।
स्रोत: यह रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। मूल कवरेज: BBC.
फ़ोटो: Atlantic Ambience / Pexels